भक्तों के ध्यानार्थ

  1. श्री त्रिमूर्तिधाम में प्रभु मौन की भाषा समझते हैं – अतएव भक्तों को मौन भाव से उनके समक्ष प्रार्थित होना चाहिए। जप वगैरा मन ही मन में करें।
  2. श्री त्रिमूर्तिधाम में अमर्यादित परिधान पहन कर आना व अमर्यादित आचरण निन्दनीय है।
  3. बाहर से लाई कोई भी वस्तु धाम में सेवनीय नहीं है।
  4. श्री बाला जी के समक्ष नमन करें – वहां न तो बैठें न ही खड़े हों – जो भी प्रार्थना वगैरा करनी हो श्री प्रेतराज दरबार में करें। श्री बालाजी एकाग्र चित भगत कि पुकार सुनते हैं – इस लिए उनके समक्ष अनावश्यक जय जय कार करना भी अशोभनीय है।