श्री त्रिमूर्तिधाम बालाजी हनुमान मंदिर

ॐ श्री गणेशाय  नमः  

 

श्री भृगु शरण मन्त्र - ( पूर्ण )

 

ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं भृगवे नमः।। 

 1. ॐ आत्मवेत्ता वेदान्त सूक्ष्म तत्व परं ग्रही।  

विधि मानस भूतिश्च श्री भृगु शरणं मम।। 

   

2. ॐ ह्रींमीश स्यसंस्पर्शी ख्याति जानि स्वयं प्रभुः।   

श्रीं सेवक पारिजातः श्री भृगु शरणं मम।। 

   

3. ॐ क्लीं अन्तः प्रकाशी च ज्योतिषां ज्योति रेव च। 

महर्षिणां चन्द्र मौली श्री भृगु शरणं मम।।

   

4. हसौं  हंसः परं ब्रह्म योगिनां योगचितप्रभुः।  

रघूणां सुप्रकाशी च श्री भृगु शरणं मम।। 

 

5. प्रां भक्तैक रक्षी च भृगु पाताभ्रं भ्रंशनः। 

मुनीनामुत्तमाचार्यः श्री भृगु शरणं मम।।  

 

6. क्रींमाद्या तत्व संवेत्ता षोडशी नेत्र कुमदक। 

दत्तानुक्रोश पात्रश्च श्री भृगु शरणं मम।। 

 

7. हलीं विद्योपदेष्टा च पीत वस्त्रादि स्रगधरः । 

धाता विधाता शुक्रश्च श्री भृगु शरणं मम।। 

 

8. ऐं अपर्णा भरण बन्धु, दक्ष पूज्य कर ग्रहे। 

नाना शास्त्र प्रकर्ता च श्री भृगु शरणं मम।। 

 

9. शिवाज विष्णु नामीशो दृष्टा तेषां च संस्थितिम्ः।  

कमलाजः कमलाशापः श्री भृगु शरणं मम।। 

 

10. भृगु लताङ्कित हरि रिन्दरा मदमर्दनः।  

विष्णु नम्यासुराचार्यः श्री भृगु शरणं मम।। 

 

11. रुद्रभ्राता शिवं दायी ब्रह्मचारि महेश्वरः। 

भक्त भावी भक्त बोधि श्री भृगु शरणं मम।। 

 

12. सुधाब्धि योगवर्षी च योग भास्कर चोदयी।  

श्याम श्यामा भेद वक्ता श्री भृगु शरणं मम।। 

 

13. कार्तिकेय शिवः स्कन्दः चराचर परं गतिः।  

 महर्षीणां सार्वभौमः श्री भृगु शरणं मम।। 

 

14. गंगा यमुना सरस्वत्यथ रेवा नर्मद भूग्रहः।

भक्त मानस हंसश्च श्री भृगु शरणं मम।।

 

15. स्वयं ज्योति सुप्रकाशः सुमनोगः शांतिभूषणः। 

शुभाशुभ परिद्रष्टा श्री भृगु शरणं मम।।

 

16. ह्सौं श्रेष्ठः सर्वनामी सत्यधर्म प्रकाशकः। 

सर्व बीजांकुरोदभासः श्री भृगु शरणं मम।।

 

17. श्रीदः सर्वात्म भावी च सर्व कर्म प्रकाशकः। 

सर्व लक्षण योगज्ञः श्री भृगु शरणं मम।। 

 

18. महर्षीणां परिवृढ: वृद्धः श्वेत लोमशः। 

सुधा कमण्डलु धर्ता श्री भृगु शरणं मम।।

 

19. कर्म योगाभास भास्वन् भास्करः पुण्य भूतिदः। 

दानं तपो नामदर्शी श्री भृगु शरणं मम।।

 

20. वेदान्त कर्म संग्राही भक्ति देव बनेचरः। 

त्रिकालज्ञः कलाधारी, श्री भृगु शरणं मम।।

 

21. षोढान्यास नेता च भक्तानुकम्पया द्रवी। 

सुधावाणी विघ्नहर्ता श्री भृगु शरणं मम।।

 

22. सर्वाशंका मनोज्ञाता, काम्य कर्म प्रकाशकः ।   

कर्मा कर्म विपाकज्ञ: श्री भृगु शरणं मम ।।     

 

23. सर्वधर्म परिष्कर्ता सत्यमार्ग विशोधकः।  

शरणागत संमरी शान्तः श्री भृगु शरणं मम।। 

 

24. तन्त्रमार्ग परिष्कारी प्रवृत्तिश् च निवृत्तिकः। 

सर्व देवांश शंसी च श्री भृगु शरणं मम।। 

 

25. सुधा स्त्रोत वही वाणी योगार्णव मन्थनी हरिः। 

सर्वशस्त महानामा श्री भृगु शरणं मम।। 

 

26. कृष्ण चिन्तयो राम मोदी शिवस्तोताम्बिकानुतः । 

सर्वयुग परिभूतः श्री भृगु शरणं मम।। 

 

27. सर्व साक्षी सर्वमार्गी सर्वशास्त्र प्रवर्तकः।  

सर्वेभ्यः सुखदाता च श्री भृगु शरणं मम।। 

 

28. सच्चिदानन्द रूपश्च सत्कला सुप्रवर्धनः।  

सर्वनामी सर्व सौम्यः श्री भृगु शरणं मम।।

 

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गायत्री मन्त्र - Gyatri Mantra

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।  


महा मृत्युंजय मन्त्र - Maha Mirtunjay Mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।  


आगामी मुख्य कार्यक्रम

पर्व:- श्री प्रेतराज जयन्ती

जनवरी
मंगलवार
23
श्री प्रेतराज जयंती | रथ सप्तमी | आरोग्य सप्तमी
23-01-2018
श्री राम चरित्र मानस पाठ प्रारम्भ प्रातः 9 बजे।
24-01-2018
श्री सुन्दरकाण्ड पाठ संगव 10 बजे ।
मध्यान 12:30 बजे से भण्डारा है।

पर्व:- श्री महाशिवरात्रि

फरवरी
सोमवार
12
12-02-2018
श्री राम चरित मानस अखण्ड पाठ प्रारम्भ प्रातः 9 बजे।
13-02-2018
श्री अमरेश्वर लिंगार्चन व् अखण्ड अभिषेक प्रारम्भ प्रात: 7:30 बजे।
श्री पताका रोपण मध्यान 12 बजे।
श्री औषधी सायं 7 बजे।
श्री जागरण रात्री 8 बजे से
14-02-2018
श्री औषधी प्रातः सूर्योदय पर।
श्री भण्डरा प्रारम्भ मध्यान 12:30 बजे।

मुख्य समाचार

पर्व:- श्री प्रेतराज जयन्ती

03 फरवरी 2017

पर्व श्री प्रेतराज जयन्ती, श्री त्रिमूर्तिधाम में 2 फरवरी को बड़ी हर्षोलास के साथ मनाया गया। 


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