श्री राम जी की आरती

जगमग, जगमग, जोत जगी है, राम आरती, होन लगी है। जगमग, जगमग, जोत जगी है।

मन्द मुस्कान, स्मित मुस्काई, अदभुत छवि, कैसी है बनाई,
भव तरन की अब – आस जगी है। — राम आरती, होन लगी है। 

रूप मनोहर, सज्जा निराली, श्याम वदन, भवें है काली,
भव से भवें है, तारण वाली, आरती हरण, सुखदा वर वाली,
आस जगी, अब लौ, जो लगी है। — राम आरती, होन लगी है।

उन चरणन का, ध्यान लगायें, जिनके शिव, आज भी, गुण गायें,
हरते द्वन्द, जो उनको सेवत, जिनको धोकर तर गया केवट,
उन चरणन अब, लौ लगी है। — राम आरती, होन लगी है। 

राम रमन भव, ताप हरन है, मोह-मद से निर्विकार करन है,
सब दुःख दोष, हरण कर तारे, अवलम्ब एक राम का पारे,
विनय करत, रस राम पगी है। — राम आरती, होन लगी है।

मन्दमति हम, सब अनजाने, प्रभु माया को, क्या पहचाने,
बिषम माया, कोई कैसे जाने, जिन को जनाये, वही पहचाने,
दया कृपा की, आस जगी है।  — राम आरती, होन लगी है। 

देव ऋषि, जिनके गुण गायें, निश्दिन जिनका, ध्यान लगायें,
जो सुख सम्पति देने वाले, उन्ही चरणों का, ध्यान लगाले,
जिन चरणों से आस जगी है।  — राम आरती, होन लगी है।