श्री त्रिमूर्तिधाम बालाजी हनुमान मंदिर

शिव पूजा कैसे ?

  • देव पूजन करने से पूर्व स्नान कर शुद्ध होना एवं शुद्ध वस्त्र धरण करना तो होता ही है, पर शिव पूजन करने वाले को सिले हुए वस्त्र पहने हुए नहीं होना चाहिए। पुरूषों के लिए लाँग वाली धोती पहने हुए होना बहुत ही अच्छा है।
  • आसन, जिस पर बैठें, शुद्ध होना चाहिए।
  • पूजा के समय पूर्व या उत्तर मुख बैठना और पूजन का संकल्प करना बहुत ही श्रेष्ठ है।
  • भस्म, त्रिपुण्ड और रूद्राक्ष माला पूजक के शरीर पर विशेष तौर पर होना चाहिए।
  • भगवान शंकर की पूजा में किसी प्रकार का चम्पा पुष्प नहीं चढ़ाया जाता है।
  • भगवान शिव के चरणों में पुष्प चढ़ाये जाने चाहिए, न कि शिवलिंग के ऊपर। पुष्प माला शिवलिंग को पहनाई जा सकती है। सभी देवों के चरणों में ही पुष्प छोड़े जाने चाहिए। शिवलिंग के चरणों में सोमवार को गेंदे के फूल, मंगलवार को आक के फूल, बुधवार को धतूरे के फूल, बृहस्पतिवार को गुलाब के फूल, शुक्रवार को चांदनी के फूल, शनिवार को लाल कनेर के फूल, रविवार को आक, धतूरा और गेंदे के फूल किसी पात्र या पत्ते पर रखकर अर्पण करने चाहिए। पत्ता आक या एरंड का त्याज्य है।
  • शिव पूजा में तुलसी दल और दूर्वा चढ़ाया जाता है।
  • तुलसी मंजरी शिव को अधिक प्रिय है।
  • बिल्व पत्र तो इनकी पूजा में प्रधान है ही, किन्तु उसमें चक्र या वज्र न होना चाहिए न ही पत्र कटा फटा हो। बिल्व पत्रों में कीड़ों द्वारा बनाया हुआ जो सफेद चिन्ह होता है, उसे ही चक्र कहते हैं और बिल्व पत्र की डण्ठल की ओर जो मोटा भाग होता है, उसे ही वज्र कहते हैं, उस भाग को तोड़ देना चाहिए। शिवार्पण के हेतु बिल्व पत्र सोमवार व बुधवार के दिन नहीं तोडे़ जाने चाहिये। अभाव में शिव को पहले अर्पण किया बिल्व पत्र जल से शुद्ध करके पुनः चढाया जा सकता है। बिल्व पत्र शिवलिंग. पर उल्टा चढाया जाता है न कि सीधा।
  • नील कमल का पुष्प शिव को बहुत प्रिय है।
  • कुमुदिनी पुष्प अथवा कमलिनी पुष्प का भी प्रयोग शिव पूजा में होता है।
  • बिल्व पत्र तीन दल से लेकर ग्यारह दलों तक के प्राप्त होते हैं। यह जितने अधिक दलों के हों उतने ही उत्तम हैं, पर इनमें यदि कोई दल टूट गया हो तो, चढ़ाने योग्य नहीं होता।
  • भगवान शिव की पूजा में करताल नहीं बजाया जाता।
  • शिव की परिक्रमा में सम्पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती। जिधर से चढ़ा हुआ जल निकलता है, उस नाली का उल्लंघन न कर उस से उल्टी दिशा में प्रदक्षिणा की जाती है। पर यदि नाली ढ़की हुई हो तो प्रदक्षिणा में कोई दोष नहीं है।
  • भगवान आशुतोष शिव को सीधे प्रणाम न करके नन्दी जी के पीछे जाकर दण्डवत करना चाहिये।
  • शिवलिंग और नन्दी के मघ्य में से नहीं गुजरना चाहिये।
  • स्त्रियों को पाषाणलिंग व धातुलिंग का पूजन करना शास्त्रोक्त नहीं है - उन्हें पार्थिव लिंग का (बालू का लिंग) निर्माण करके गृह स्थान में ही पूजन करना चाहिये। भगवती सीता ने - भगवती अञ्जना ने - भगवती अनुसूया ने भी पार्थिव लिंग बना कर शास्त्रानुसार उसका पूजन किया था। किन्तु कलि के इस युग में शिवालयों में नारियाँ अनजाने में पाषाणादि लिंगो का पूजन करती इत स्ततः नजर आती हैं जो कि मर्यादा के प्रतिकूल है। हाँ, भगवान शंकर के विग्रह का वह पूजन कर सकती हैं - उसमें कोई दोष नहीं है।

आगामी मुख्य कार्यक्रम

पर्व:- श्री प्रेतराज जयन्ती

जनवरी
मंगलवार
23
श्री प्रेतराज जयंती | रथ सप्तमी | आरोग्य सप्तमी
23-01-2018
श्री राम चरित्र मानस पाठ प्रारम्भ प्रातः 9 बजे।
24-01-2018
श्री सुन्दरकाण्ड पाठ संगव 10 बजे ।
मध्यान 12:30 बजे से भण्डारा है।

पर्व:- श्री महाशिवरात्रि

फरवरी
सोमवार
12
12-02-2018
श्री राम चरित मानस अखण्ड पाठ प्रारम्भ प्रातः 9 बजे।
13-02-2018
श्री अमरेश्वर लिंगार्चन व् अखण्ड अभिषेक प्रारम्भ प्रात: 7:30 बजे।
श्री पताका रोपण मध्यान 12 बजे।
श्री औषधी सायं 7 बजे।
श्री जागरण रात्री 8 बजे से
14-02-2018
श्री औषधी प्रातः सूर्योदय पर।
श्री भण्डरा प्रारम्भ मध्यान 12:30 बजे।

मुख्य समाचार

पर्व:- श्री प्रेतराज जयन्ती

03 फरवरी 2017

पर्व श्री प्रेतराज जयन्ती, श्री त्रिमूर्तिधाम में 2 फरवरी को बड़ी हर्षोलास के साथ मनाया गया। 


Download our Android AppDownload our Calendar in PDF for OfflineSubscribe to our Google Calendar for Complete Hindi Samvat CalendarClick here and feel to write us