लगाले प्रीत भगवन से

लगाले प्रीत भगवन से, वही मुक्ति के दाता हैं, विधाता हैं वे दुनियाँ के, वही सब जग के दाता हैं । लगाले०

चरणों में प्रीत जब उनके, लगाएगा जमाने में, जो सच्चे मन से चाहेगा, तो खुशियाँ वो दिलाता है । लगाले०

इश्क गैरों से करता है, बढ़ाले यारी तँ उस से, वही है यार सच्चा बस, उसी से सच्चा नाता है । लगाले० ।

खुदा का नूर सच्चा जब, नजर दुनियाँ में आता है, उसी दम सारी दुनियाँ का, अंधेरा भाग जाता है । लगाले०.