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श्री बाला जी से शयन से पूर्व की प्रार्थना

अगर समाई नींद नयन में तो तुम प्रभु सो जाओ।
झूलूँगा स्वामी पंखा तुम सपनों में खो जाओ।
सोनें का मैनें पलंग बिछाया रेशम का बिछौना।
तकिया प्रेम का उसपे लगाया, तुम प्रभु प्रेम से सोना।

दूध कटोरा भर कर लाया पीलो तुम गिरधारी।
दिनभर तंग किया भूतों ने अब है शरण तिहारी।
तुम सृजन करते दुनियाँ का तुम पालन करते हो स्वामी।
थक जाते होंगे दिनभर में, थोड़ा आराम करो स्वामी।

दिन भर खड़े खड़े बीता भक्तो को आनंद दिया स्वामी।
आराम करो अब बिस्तर पर में भोर भये आऊँ स्वामी।
दुनियाँ के झंझट ऐसे हैं जो कभी खत्म न हों स्वामी।
तुम आँखे बंद करो भगवन लो नमन हमारा अब स्वामी।

श्री बाला जी को प्रातः जगाने हेतु प्रार्थना – 1

श्री पवन पुत्र हनुमान, महाबलवान, हुआ है सवेरा ।
जागो नाथ दयालु, दयानिधे, काटो संकट मेरा ।।

अंजनि के हे पूत, बड़े मजबूत, में दास हूँ तेरा ।
जागो नाथ दयालु, दयानिधे, काटो संकट मेरा ।।

दुष्टो का हो काल, महाविकराल, संकट ने घेरा ।
जागो नाथ दयालु, दयानिधे, काटो संकट मेरा ।।

सिंधु गए थे लांघ, लगा के छलांग, पता है तेरा ।
जागो नाथ दयालु, दयानिधे, काटो संकट मेरा ।।

लाये तुम थे शैल, ऐसे हो छैल, लगाया डेरा ।
जागो नाथ दयालु, दयानिधे, काटो संकट मेरा ।।

अंजना रही जगा, रहा हूँ उठा, भक्त हूँ तेरा ।
जागो नाथ दयालु, दयानिधे, काटो संकट मेरा ।।

श्री बाला जी को प्रातः जगाने हेतु प्रार्थना – 2

जरा आँख तो खोलो बाला जी।
तेरे द्वारे खड़े दिन बीत रहे, हमारा संकट काटो, बाला जी।।

हम गगरी भर कर लाये हैं, तुम उठो नहालो बाला जी।
जरा आँख तो खोलो बाला जी।।

हम चोला लेकर आये हैं, तुम इसे चढालो बाला जी।
जरा आँख तो खोलो बाला जी।।

हम हार फूलों के लाये हैं, तुम इन्हें पहनलो बाला जी।
जरा आँख तो खोलो बाला जी।।

हम केसर तिलक लेकर आये, तुम इसे लगाओ बाला जी।
जरा आँख तो खोलो बाला जी।।

हम लडडू लेकर आये हैं, तुम भोग लगाओ बाला जी।
जरा आँख तो खोलो बाला जी।।

हम भक्ति मांगने आये हैं, तुम भक्ति दे दो बाला जी।
जरा आँख तो खोलो बाला जी।।

हम शक्ति मांगने आये हैं, तुम शक्ति दे दो बाला जी।
जरा आँख तो खोलो बाला जी।।

हम खाली झोली लाये हैं, तुम झोली भर दो बाला जी।
जरा आँख तो खोलो बाला जी।।

सोरठा
प्रनवउँ पवन कुमार खल वन पावक ज्ञान घन।
जासु ह्रदय अगर बसहिं राम सर चाप धर।।

श्री आदित्याय जी की प्रातः स्मरणीय परम दिव्य द्वादश नामावली

  1. ॐ आदित्याय नमः
  2. ॐ दिवाकराय नमः
  3. ॐ भास्कराय नमः
  4. ॐ प्रभाकराय नमः
  5. ॐ सहस्त्रांशुवे नमः
  6. ॐ त्रैलोक्य लोचनाय नमः
  7. ॐ दिनकराय नमः
  8. ॐ द्वादशात्मकाय नमः
  9. ॐ त्रयोमूर्तये नमः
  10. ॐ सूर्याय नमः
  11. ॐ हरिदश्वाय नमः
  12. ॐ विभावसवे नमः
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श्री सूर्यदेव जी के 108 नाम

  1. ॐ अंगारकाय नमः
  2. ॐ अंशुमते नमः
  3. ॐ अग्नये नमः
  4. ॐ अजाय नमः
  5. ॐ अदितिपुत्राय नमः
  6. ॐ अनन्ताय नमः
  7. ॐ अरिहाय नमः
  8. ॐ अर्काय नमः
  9. ॐ अर्यमाय नमः
  10. ॐ अलोलुपाय नमः
  11. ॐ अश्वत्थाय नमः
  12. ॐ आदित्याय नमः
  13. ॐ आदिदेवाय नमः
  14. ॐ आपाय नमः
  15. ॐ इन्द्राय नमः
  16. ॐ कपिलाय नमः
  17. ॐ कलयुगाय नमः
  18. ॐ कलायै नमः
  19. ॐ कामदाय नमः
  20. ॐ कालाध्यक्षाय नमः
  21. ॐ कालाय नमः
  22. ॐ काळचक्राय नमः
  23. ॐ काष्ठाय नमः
  24. ॐ क्षणाय नमः
  25. ॐ परम पुरुषाय नमः
  26. ॐ घातायै नमः
  27. ॐ जयाय नमः
  28. ॐ जीमूताय नमः
  29. ॐ जीवनाय नमः
  30. ॐ तमोनुदाय नमः
  31. ॐ तेजपत्या नमः
  32. ॐ तेजसे नमः
  33. ॐ त्रयोमूर्तये नमः
  34. ॐ त्रिविष्टपाय नमः
  35. ॐ त्रेताय नमः
  36. ॐ त्रैलोक्य लोचनाय नमः
  37. ॐ त्वष्टाय नमः
  38. ॐ दक्षाय नमः
  39. ॐ दिनकराय नमः
  40. ॐ दिवाकराय नमः
  41. ॐ दीप्तांशवे नमः
  42. ॐ देहकर्ताय नमः
  43. ॐ द्वादशत्मकाय नमः
  44. ॐ द्वादशात्मने नमः
  45. ॐ द्वापराय नमः
  46. ॐ धर्मध्वजाय नमः
  47. ॐ धूमकेतवे नमः
  48. ॐ नारायणाय नमः
  49. ॐ परायणाय नमः
  50. ॐ पुरुषाय नमः
  51. ॐ पूष्णे नमः
  52. ॐ पृथ्वै नमः
  53. ॐ प्रजाद्वाराय नमः
  54. ॐ प्रजाध्यक्षाय नमः
  55. ॐ प्रभाकराय नमः
  56. ॐ प्रशान्तात्मने नमः
  57. ॐ बुधाय नमः
  58. ॐ बृहस्पतये नमः
  59. ॐ भानवे नमः
  60. ॐ भानुमते नमः
  61. ॐ भास्कराय नमः
  62. ॐ भूतपत्या नमः
  63. ॐ भूताश्रयाय नमः
  64. ॐ मगाय नमः
  65. ॐ मृत्यवे नमः
  66. ॐ मोक्षद्वाराय नमः
  67. ॐ यमाय नमः
  68. ॐ योगिने नमः
  69. ॐ रवये नमः
  70. ॐ रुद्राय नमः
  71. ॐ वरदाय नमः
  72. ॐ वरुणाय नमः
  73. ॐ वायवे नमः
  74. ॐ विभावसवे नमः
  75. ॐ विशालाय नमः
  76. ॐ विश्वकर्मणे नमः
  77. ॐ विष्णवे नमः
  78. ॐ वेदकर्ताय नमः
  79. ॐ वेदवाहनाय नमः
  80. ॐ वेदांगाय नमः
  81. ॐ व्यत्काव्यक्राय नमः
  82. ॐ शनैश्चराय नमः
  83. ॐ शाश्वताय नमः
  84. ॐ शुक्राय नमः
  85. ॐ शुचिने नमः
  86. ॐ सत्ययुगाय नमः
  87. ॐ सनातनाय नमः
  88. ॐ सर्वतोमुखाय नमः
  89. ॐ सर्वभूतनिषेविताय नमः
  90. ॐ विश्वात्मने नमः
  91. ॐ सर्वभूतादिकाय नमः
  92. ॐ सर्वलोकनमस्कृताय नमः
  93. ॐ संवत्सरकराय नमः
  94. ॐ संवर्तकाय नमः
  95. ॐ सवितायै नमः
  96. ॐ सागराय नमः
  97. ॐ सूक्ष्मात्मने नमः
  98. ॐ सुपर्णाय नमः
  99. ॐ स्वर्गद्वाराय नमः
  100. ॐ लोकोधाराय नमः
  101. ॐ सूर्याय नमः
  102. ॐ सृष्टाय नमः
  103. ॐ सोमाय नमः
  104. ॐ स्कन्दाय नमः
  105. ॐ स्वयम्भुवे नमः
  106. ॐ हरिदश्वाय नमः
  107. ॐ चराचरात्मने नमः
  108. ॐ विश्वतोमुखाय नमः

काल के जनक भगवान भास्कर के अष्टोत्तर शत नाम का जप अरुणोदय में कर – उन्हें सुगन्धित जल से अर्घ्य प्रदान नित्यप्रति करें इससे आपका जीवन सौरभमय व सुखद् होगा।

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लगाले प्रीत भगवन से

लगाले प्रीत भगवन से, वही मुक्ति के दाता हैं,
विधाता हैं वे दुनियाँ के, वही सब जग के दाता हैं। लगाले …

चरणों में प्रीत जब उनके, लगाएगा जमाने में,
जो सच्चे मन से चाहेगा, तो खुशियाँ वो दिलाता है। लगाले …

इश्क़ गैरों से करता है, बढ़ाले यारी तूँ उस से,
वही है यार सच्चा बस, उसी से सच्चा नाता है। लगाले …

खुदा का नूर सच्चा जब, नज़र दुनियाँ में आता है,
उसी दम सारी दुनियाँ का, अँधेरा भाग जाता है। लगाले …

श्री महामाया जी

श्री महामाया जी

अष्टादशभुजा धारिणी महामाया जो अखिल ब्रह्माण्डों की मूल हैं।

श्री अनन्तशायी जी

श्री अनन्तशायी जी

अखिल ब्रह्माण्डों के नायक भगवान् अनन्तशायी विग्रह रूप में विराजमान।

महर्षि भृगु जी

महर्षि भृगु जी

युग युगान्तर से तपोरत महर्षि भृगु जी दिव्य विग्रह में शोभायमान, जिन्होंने भगवान् विष्णु के वक्ष पर पाद प्रहार किया था।