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पर्व:- श्री राम नवमी

14-16 अप्रैल को श्री त्रिमूर्तिधाम में श्री राम नवमी  पर्व पूर्ण हर्षाेल्लास से मनाया गया।

14 अप्रैल को श्री रामचरित मानस पाठ का आयोजन हुआ। अगले दिन 15 अप्रैल को श्री पताका रोपण, श्री औषधि, श्री बाला जी अभिषेक एवं दीपदान, एवं श्री जागरण आयोजन हुआ। श्री बाला जी अभिषेक एवं दीपदान में १००८ दीप भक्तो द्वारा प्रज्वलित किये गए साथ में बालाजी का अभिषेक आरती कीर्तन हुआ। अगले दिन 16 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे से श्री भण्डारे का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में भक्तजनों ने आस पास के निवासियों ने भाग लिया।

श्री हनुमान जी की आरती (त्रिमूर्तिधाम की)

(यह आरती प्रातः काल नहीं की जानी चाहिए)

जय हनुमत बाबा, जय जय हनुमत बाबा।
रामदूत बलवन्ता, रामदूत बलवन्ता, सब जन मन भावा।
जय जय हनुमत बाबा।

अंजनी गर्भ सम्भूता, पवन वेगधारी, बाबा पवन वेगधारी।
लंकिनी गर्व निहन्ता, लंकिनी गर्व निहन्ता, अनुपम बलधारी।
जय जय हनुमत बाबा।

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महर्षि श्री भृगु जी की आरती

स्तुति

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।
अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्। तत् पदम् दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः।।
नमस्ते भगवते भृगुदेवाय वेधसे। देव देव नमस्तुते भूत भावन पूर्वज।।

आरती

जय भृगुदेव हरे, जय जय भृगुदेव हरे। स्वामी जय जय भृगुदेव हरे।।
सत्य सनातन स्वामी, सत्य सनातन स्वामी, जग अघ दूर करे।
जय जय भृगुदेव हरे।।

अभयमुद्रा भय हारिणी, वरद हस्त सोहे। स्वामी वरद हस्त सोहे।।
अनुपम छवि सुखदायनी, अनुपम छवि सुखदायनी, त्रिभुवन मन मोहे।
जय जय भृगुदेव हरे।।

हृदय अज्ञान निवारण, सर्वसिद्धि दाता। स्वामी सर्वसिद्धि दाता।।
दुःख भंजन सुख अंजन, दुःख भंजन सुख अंजन, निश्चल गति दाता।
जय जय भृगुदेव हरे।।

करुणासिन्धु जग पालक, त्राता भय हारी। स्वामी त्राता भय हारी।।
हरि रूप सर्व व्यापक, हरि रूप सर्व व्यापक, भोले भण्डारी।
जय जय भृगुदेव हरे।।

भक्ति ज्ञान प्रदाता, भक्तन हितकारी। स्वामी भक्तन हितकारी।।
भुक्ति मुक्ति के दाता, भुक्ति मुक्ति के दाता, त्रिभुवन सुखकारी।
जय जय भृगुदेव हरे।।

नित्य निरञ्जन देव, अखिल लोक स्वामी। प्रभु अखिल लोक स्वामी।।
दयाधाम गुण सागर, दयाधाम गुण सागर, तुम अंर्तयामी।
जय जय भृगुदेव हरे।।

भृगुदेव जी की आरती, सब का दुःख हरती। स्वामी सब का दुःख हरती।।
सभी भव त्रास मिटा कर, सभी भव त्रास मिटा कर, अज्ञान तिमिर हरती।
जय जय भृगुदेव हरे।।

भृगुदेव जी की आरती, जो कोई जन गावे। स्वामी प्रेम सहित गावे।।
मिले बैकुण्ठ परम पद, मिले बैकुण्ठ परम पद, भक्ति मुक्ति पावे।
जय जय भृगुदेव हरे।।

त्वमेव माता च पिता त्वमेव। त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव। त्वमेव सर्व मम देव देव।

ॐ श्री विष्णु रुपाय श्री महर्षि भृगवे नमो नमः।

Prarthna Pustak

श्री हनुमान वन्दना

अतुलित बलधामं हेमशैलाभ देहं‚ दनुजवन कृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।...

श्री हनुमान जी की स्तुति

नमो केसरी पूत महावीर वीरं, मंङ्गलागार रणरङ्गधीरं। कपिवेष.. →...

श्री हनुमान जी की आरती (त्रिमूर्तिधाम की)

(यह आरती प्रातः काल नहीं की जानी चाहिए) जय हनुमत बाबा, जय.. →...

श्री राम वन्दना

छ- मामभिरक्षय रघुकुल नायक धृत बर चाप रुचिर कर सायक ।। .. →...

श्री राम जी की स्तुति

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं । नवकञ्ज.. →...

श्री महालक्ष्म्यष्टकम्

नमस्तेऽस्तु महामाये श्री पीठे सुरपूजिते । शंङ्ग चक्र गदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥१॥ .. →...

श्री बालाजी की स्तुति (संसार के पालन हार हो तुम)

संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे‚ हम सबके.. →...

श्री नवग्रह स्तोत्रम्

जपा कुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम् । तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम् ||१||.. →...

श्री तुलसीदास जी कृत रुद्राष्टकम्

नमामी शमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपम्.. →...

महर्षि श्री भृगु जी की आरती

स्तुति गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।.. →...

प्रार्थना

गुरू ब्रह्मा गुरु विष्णुः गुरू र्देवो महेश्वरः । गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः...

गुरु वन्दना

गुरुदेव सुनो, मैं पड़ा यहां, सिर रखे तुम्हारे चरणों में, इनका ही सहारा रखना सदा...

गणेश वन्दना

जय-जय गणनायक - हृदय विधायक- एक दन्त महाकाय,.. →...

क्षमा प्रार्थना

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन , यत्पूजितं मयादेव.. →...

औषधि – सूजन एवं दर्द के लिए

यदि चोट के पश्चात सूजन एवं दर्द रहे तो – निम्नलिखित 

निर्गुण्डी (संभालु) के पते,  थोड़ी सी फिटकरी,   थोड़ा सा नमक को पानी में उबालें व टकोर (उबले पानी में पैर डुबायें) करने से जमा हुआ खून (ब्लड कलौट),  सूजन एवं दर्द में प्रभु कृपा से आराम मिलेगा।

औषधि – दांतों की मजबूती के लिए

कीकर की छाल मुंह में रख कर चूसें।

कीकर की दातुन का प्रयोग करें। 

उपर दिये गये उपायों से आपके दांत और जबड़ा प्रभु कृपा से मजबूती प्राप्त करेंगें।   

संकट मोचन हनुमानाष्टक 

(हनुमान चालीसा के पाठ के बाद अवश्य ही एक पाठ तो करें ही करें।)

बाल समय रविभक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी बिनती तब, छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो॥१॥

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मुख्य कार्यक्रम

भण्डारे – पूरे वर्ष में पड़ने वाले मुख्य पर्वों पर भण्डारों का आयोजन भी किया जाता है:-

  1. श्री प्रेतराज जयन्ती – रथ सप्तमी के दिन
  2. श्री महाशिवरात्रि – के अगले दिन
  3. श्री रामनवमी – के अगले दिन
  4. श्री हनुमान जयन्ती – के अगले दिन
  5. श्री परशुराम जयन्ती – अक्षय तृतीया के दिन
  6. श्री बुद्ध पूर्णिमा – के अगले दिन
  7. श्री संस्थापना दिवस – के दिन 25 जून को
  8. श्री गुरू पूर्णिमा – के दिन
  9. श्री श्रावण शिवरात्रि – के अगले दिन
  10. श्री भृगु जयन्ती – रक्षा बन्धन के दिन
  11. श्री तुलसीदास जयन्ती – श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन
  12. श्री परम दिव्यज्योति प्रकट दिवस – के दिन 31 अगस्त को
  13. श्री हनुमान जयन्ती – के दिन
  14. श्री भैरव जयन्ती – के दिन
  15. श्री दत्त जयन्ती – के अगले दिन

  1. श्री गणेश जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  2. महर्षि भृगुजी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  3. श्री राम जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  4. श्री विष्णुजी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  5. श्री शंकर जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  6. श्री उमा जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  7. श्री महामाया जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  8. श्री हनुमान जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  9. श्री सूर्यदेव जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  10. श्री सूर्यदेव जी के 12 नाम - Download PDF for offline reading
  11. श्री कृष्ण जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
  12. श्री राधिका जी के 108 नाम - Download PDF for offline reading
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